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बारिश एक मिलन : An Ancient Love Story

एक राज्य में एक बहुत बड़ा गुरुकुल था। उसमें दूर-दूर से छात्र छात्राएं शिक्षा-ग्रहण करने के लिए आते थे। गुरुकुल में श्रुत नाम का एक होनहार, तेजस्वी, परिश्रमी एवं आज्ञाकारी छात्र था। वह अपने गुरु की कुटिया की साफ-सफाई एवं उनके लिए भोजन का प्रबन्ध करता था । एक बार जब श्रुत गुरुजी के लिए जंगल में फल लेने गया तो उसे एक बंदर का बच्चा जख्मी अवस्था  में मिला।
उस बच्चे को उस राज्य के राजा ने अपने शिकार के दौरान गलती से घायल कर दिया था। श्रुत उसे अपने साथ ले आया और काफी उपचार करने के बाद वह बच्चा ठीक हो गया । श्रुत ने उसका नाम पवन रखा। अब पवन आश्रम में श्रुत के साथ रहता था, और गुरुजी के लिए फल तोड़ने में मदद करता था।












गुरुकुल का नया सत्र प्रारम्भ हुआ। बहुत से छात्र-छात्राओं ने गुरुकुल में प्रवेश लिया। इस बार उस राज्य के राजा की पुत्री जिसका नाम सुदिव्या था, ने भी गुरुकुल में प्रवेश लिया। सभी छात्र ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करने के लिए  सदावरी नदी जाते थे। उसके बाद आश्रम में आकर शिक्षा गहण करते थे।दोपहर को सभी भोजन की तलाश में जंगल जाते थे, शाम को सभी यज्ञ किया करते थे। राजकुमारी सुदिव्या सुंदर होने के साथ-साथ आज्ञाकारी भी थी। वह गुरु की सेवा में लीन शिष्य श्रुत से काफी प्रभावित हुई। वह गुरु की सेवा में लीन श्रुत का हाथ बटाने लगी। सुदिव्या को जानवरों से बहुत प्यार था। उसको श्रुत का पवन बहुत पसंद आया । धीरे-धीरे वह पवन के साथ खेलने की आदी हो गई और उसकी देखभाल भी करने लगी। सुदिव्या भी अब पवन और श्रुत के साथ जंगल में गिरुजी के लिए फल लेने के लिए साथ-साथ जाने लगी। धीरे-धीरे दोनों एक-दुसरे से प्रभावित होकर एक-दूसरे को मन-ही-मन पसंद करने लगे। एक दिन जब सभी स्नान के लिए गए तो राजकुमारी समेत कुछ छात्राएं नहाने के लिए नदी की गहराई तक चले गई। नदी के तेज प्रवाह के आगे वह नहीं टिक सकी और नदी में बह गयी। सभी में हाहाकार मच गया। श्रुत तैराकी में निपुण था; वह अपनी जान की परवाह किये बगैर नदी के तेज प्रवाह में कूद पड़ा। बारी-बारी से श्रुत ने राजकुमारी सहित सभी की जान बचा ली। सुदिव्या श्रुत के इस साहसिक कार्य से इतनी प्रभावित हुई, कि उसने मन-ही-मन श्रुत को अपना जीवन साथी मान लिया। कुछ दिनों के बाद सुदिव्या ने श्रुत से अपना जीवनसाथी बनने का प्रस्ताव रखा। श्रुत मान गया, क्योंकि श्रुत को भी सुदिव्या बहुत पसंद थी। दोनों ने अपनी शादी का प्रस्ताव गुरु जी के समक्ष रखा । गुरुजी ने उनके प्रस्ताव को राजा के पास भेज दिया; राजा ने उसे स्वीकार्य नहीं किया। राजा अपनी बेटी की शादी किसी राजकुमार से ही करना चाहता था, न कि किसी आम नागरिक से। राजा का आदेश सुनकर श्रुत बहुत मायूष हुआ। वह राजा के आदेश के आगे नत मस्तक था, परंतु राजकुमारी ने जिद की। राजकुमारी के जिद के कारण राजा ने राजकुमारी को सैनिक भेजकर पुनः महल बुलवा लिया। राजकुमारी के बिछड़ने से पहले श्रुत ने राजकुमारी सुदिव्या को प्यार की निशानी के तौर पर पवन को दे दिया था।
बर्षों बीत गए पवन अब बड़ा और बलवान हो चुका था। राजा का महल एक घाटी क्षेत्र में था। दूर पहाड़ो के बीच एक नदी बहती थी। नदी के एक बांध से एक नहर के द्वारा जल उपयोग हेतु राजा के नगर में आता था। नहर के ऊपर एक बहुत बड़ी चट्टान एक रस्सी के सहारे एक विशाल पर्वत से बंधी थी। बांध टूटने की स्थिति में चट्टान को गिरा के आपातकालीन स्थिति में नहर के प्रवाह को रोका जा सकता था ।
इस बार उस राज्य में भयंकर बारिश हुई। ऐसी बारिश उस राज्य के इतिहास में पहली बार हुई थी। भयंकर बारिश के कारण नदी के प्रवाह में तेज उफान आ गया, जिस कारण नदी का बांध टूट गया। नदी के सारे पानी का प्रवाह उस नगर की और हो गया और नगर डूबने लगा।
बहाव के कारण बाहर जाने का रास्ता बंद हो गया। सभी के मुख पर चिंता की लकीरें खिंच गयी। तेज बहाव के कारण राजा के सैनिक बांध तक पहुँचने पर असमर्थ होने लगे। राजा के सारे उपाय व्यर्थ जाने लगे। अब राजा खुद को असमर्थ महसूस करने लगे। बाहर निकलने के दूसरे रास्तों के बीच जान लेगा खाई थी। लोगो में खाई पार करने का साहस नहीं था। चारों तरफ हड़कम्प मच गया। बांध को केवल पहाड़ के दूसरी ओर से ही कोई व्यक्ति चट्टान गिरा के बंद कर सकता था,पर इसमें भी जोखिम का काम था।
दूसरी समस्या यह थी, कोई यह सूचना पहाड़ पार व्यक्ति तक पहुँचाएं कैसे?
राजकुमारी सुदिव्या को पवन की शक्ति और श्रुत के साहस पर पूरा विश्वास था। उसने तुरंत पवन को श्रुत के पास संदेश बांधकर भेज दिया। पवन भगता हुआ ऊँची-नीची खाईयों को पार करता हुआ, आश्रम में श्रुत के पास जा पहुँचा। श्रुत ने गुरुजी के समक्ष उस संदेश को पड़ा। गुरुजी ने तुरंत श्रुत को बांध तक पहुंचने और उसे बंद करने का रास्ता बता दिया। श्रुत तुरंत पवन के साथ अपनी प्रिय सुदिव्या की रक्षा करने के लिए भाग खड़ा हुआ। श्रुत ने खुद को पवन की पीठ पर बांध लिया और पवन खतरनाक खाइयों को चीरता हुआ पर्वत के एक सिरे से दूसरे सिरे पर चढ़ गया। पर्वत से बंधी चट्टान की रस्सी को श्रुत ने गुरुजी के अनुसार अपनी कटार से काट दिया। रस्सी कटने के साथ ही चट्टान नहर में जा गिरा और पानी का प्रवाह मंद हो गया। प्रवाह मंद होते ही रास्ता खुल गया और डूब रहे लोग धीरे-धीरे बाहर आने लगे। राजा समेत सभी सुरक्षित स्थान पर आ गये। राजा और प्रजा श्रुत के इस साहसिक कार्य से काफी प्रभावित हुई। राजा ने खुश होकर श्रुत से अपना पुरुस्कार माँगने को कहा; श्रुत ने राजकुमारी सुदिव्या को माँग लिया। इस बार राजा ने खुशी-खुशी विवाह का प्रस्ताव मंजूर कर लिया।