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जिंदगी-हर पल का महत्व : Importance of Every Moment of Life

एक गाँव में एक खुशहाल परिवार रहता था। माँ-बाप,दादा-दादी, सभी उस परिवार में थे। इसी परिवार में एक होनहार बेटा सुसंग था। वह अपने परिवार अपने माँ-बाप का नाम दुनिया में रौशन करना चाहता था। वह पढ़ने में बहुत तेज था। वह एक सफल इंजीनियर बनना चाहता था ।
आरंभिक शिक्षा पूर्ण होने के बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए शहर चला गया। इंजीनियर की पढ़ाई के दौरान वह एक-से-एक सफल इंजीनियरों से मिला। उनसे मिलने के बाद उसके सर पर सफलता का भूत सवार हो गया। वह कठिन परिश्रम करने लगा। उसने अपने दोस्तों अपने संबंधियों यह तक कि अपने परिवार वालों से भी बात करना छोड़ दिया।
धीरे-धीरे  दिन, महीने, बर्ष बीत गए, वह अपने परिवार से मिलने नहीं गया। उसके माँ बाप उसे फ़ोन किया करते थे, परंतु उसके पास उनसे बात करने के लिए भी बक्त नहीं रहता था। हालांकि वह सब कुछ अपने माँ बाप का नाम रोशन करने के लिये ही कर रहा था। उसका सपना था कि जब मैं अपने माँ बाप से मिलूँ, तब वह एक सफल इंजीनियर बन चुका हो।उसके माँ-बाप जब भी उसे फ़ोन करते तो वह उनसे न मिलने का कोई न कोई बहना बना देता था। क्योंकि वह चाहता था कि वह उनसे जब भी मिले, तब वह इतना सफल हो चुका हो कि ढेर सारा पैसा हो, गाड़ी हो और शहर में एक अच्छा बगला हो। माँ-बाप को अपने जिगर के टुकड़े से मिले बर्षों बीत गए थे इसलिए एक दिन वह अपने बेटे को बिना बताये ही उससे मिलने के लिए शहर  को रवाना हो चले ताकि इस बार उनका बेटा कोई बहना न बना सके। जब वे शहर में आकर अपने बेटे के पते पर एक टैक्सी से आ रहे थे तभी अचानक एक धंधनाते हुए ट्रक ने उन्हें कुचल दिया। रात का बक्त था, सड़क सून-सान थी, मदद के लिए दूर-दूर तक कोई नहीं था। माँ मर चुकी थी, पिता गंभीर हालत में थे। अपने जिगर से आखिरी बार मिलने के लिए उन्होंने उसे फोन लगाया। बेटा इतना व्यत था कि उसने फोन पर ध्यान ही नहीं दिया ,और पिता की आखिरी तमना भी टूट गयी।
सुबह जब उसने फोन देखा तो पाया कि उसके पिता ने ही उसे देर रात फोन किया था। उसने फोन लगाया तो उसे एक पुलिस ऑफिसर ने उठाया और उसे रात की घटना के बारे में बताया, तो उसके होश उड़ गए। सारे सपने कांच की तरह टूट कर बिखर गए। अब उसके पास पश्च्याताप करने के लिए वक्त-ही-वक्त था।

दोस्तों जिंदगी के सफर में हर अपने को अपना वक्त दो। क्योंकि दुनिया में वक्त से कीमती कोई भी चीज नहीं होती।

"""उसने वक्त-ही-वक्त लगा दिया उनसे मिलने के लिए|
पर वक्त ने दो-वक्त की मोहलत भी न दी उसके लिए।।"""


दोंस्तो इस कहानी को अपने सभी मित्रों व संबंधियों को शेयर करना न भूले। ताकि उन्हें अपनों की कीमत का एहसास हो जाएं।