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अफसोस-एक पश्चयाताप : A Remorse

प्राचीन समय में राजा-महाराजाओं के मनुष्यों के अलावा पशु पंछीयों में भी सेवक हुआ करते थे। वे ठीक वैसे ही अपने स्वामी की सेवा किया करते थे जैसे की मनुष्य जाति के सेवक।
ऐसे ही एक राजा थे जिनका सेवक एक बाज था। बाज अपने स्वामी की रक्षा अपने प्राणों से भी ज्यादा करता था। वह हर समय राजा के साथ ही रहता था।
हर रोज की तरह ही एक दिन राजा शिकार के लिए जंगल की तरफ निकल पड़े। आज जंगल में उन्हें कोई शिकार नहीं मिल रहा था इसलिये वह उसकी तलाश में बहुत दूर तक चले गए।धीरे-धीरे वह इतना दूर निकल गए की वापिस लौटने का रास्ता ही भूल गए। भटकते-भटकते शाम से सुबह हो गयी पर राजा रास्ता खोजने
में विफल रहे। मौसम भयंकर गर्मियों का था। धीरे-धीर दोपहर होने लगी, तेज गर्म हवाएँ चलने लगी। राजा को तीव्र प्यास लगने लगी। राजा अब पानी की तलाश में जुट गए। उन्हें दूर-दूर तक पानी के आसार नजर नहीं आ रहे। राजा व्याकुल हो उठे क्योंकि प्यास भयंकर होती जा रही थी। भटकते-भटकते वह एक ऐसी जगह पहुँच गए जहाँ उन्हें आशा की किरण दिखाइ दी। उन्हें एक वृृक्ष दिखाई दिया जिस पर एक घोंसला था और उसी घोंसले से पानी की छोटी-छोटी बूंदे टपक रही थी। प्यास से प्रताड़ित राजा तुरंत अपने घोड़े से उतरकर उसी वृक्ष के नीचे पहुँच गए; तुरन्त अपनी उजली बढ़ाकर उसमें पानी की उन छोटी-छोटी बूंदों को एकत्र करने लगे। राजा का सेवक बाज उनके ऊपर आकाश में मंडरा रहा था और वह अपने स्वामी पर पूरी तरह से नजर रखे हुऐ था। राजा की उजली भरने ही वाली थी कि अचानक बाज नीचे आकर झपेटा मारकर उजली में भरे पानी को फैलाकर उड़ गया। राजा को उसकी इस शरारत पर बहुत तीव्र गुस्सा आया पर वह उसका प्रिय सेवक था इसलिए राजा ने उसे माफ कर दिया। राजा ने पुनः उजली में पानी भरना प्रारम्भ कर दिया।धीरे-धीरे फिर से उजली भरने लगी। उजली जैसे ही भरने वाली थी कि एक बार फिर से बाज ने झपट मरकर पानी फैला दिया। राज आगबबूला हो गया क्योंकि भयंकर प्यास के कारण उसका एक-एक पल काटना मुश्किल होता जा रहा था।
राजा ने किसी तरह आपने आप को रोका और एक बार फिर से उजली में पानी एकत्र करना शुरू कर दिया परन्तु एक बार फिर से जैसे ही उजली भरने वाली थी कि फिर से बाज ने नीचे आकर झपट मारकर पानी को फैला दिया। चूँकि राजा के लिए अपने सेवक की गलती माँफ करने की सारी हदे पार हो चुकी थी। तीव्र क्रोध में जल रहे और प्यास से तड़प रहे राजा ने और कुछ भी सोचने से पहले ही
अपने धनुष पर बाण चढ़ाकर उसका निशाना सीधे अपने सेवक पर लगा दिया और पल ही भर में अपने प्रिय सेवक बाज को मार गिराया। बाज धरती पर आ गिरा और उसने राजा के सामने ही फड़फड़ाते हुए अपने प्राण त्याग दिए।अपने सामने अपने सेवक को मरता हुआ देख उसका गुस्सा एकदम शांत हो गया। जब गुस्सा शांत हुआ तो वह सोचने लगा कि इसने आजीवन मेरा साथ दिया और कई बड़े कामों में मेरी मदद की परन्तु आज इसने मेरे साथ ऐसा क्यों किया। एकाएक उसके मन में विचार आया, तुरंत ही वह पेड़ पर चढ़ गया और उस घोसले में झांकने लगा जिससे पानी टपक रहा था। उस घोसले में झांकते ही राजा पश्चयाताप के कारण चूर-चूर हो गये। क्योंकि उस घोंसले में एक मोटा जहरीला सर्प मरा हुआ पड़ा था। वह पूरी तरह से सड़ चुका था और उसके बदन से ही जहरीला पानी टपक रहा था। राजा अफसोस करने लगे कि काश मेरे मन में यह विचार पहले ही आ जाता तो शायद में इतना बड़ा पाप करने से बच जाता और मेरा सेवक मेरे साथ होता। पर अब अफसोंस करने से क्या फायदा क्योंकि
""" वक्त कभी भी वापिस लौटकर नहीं आता """
दोस्तों अगर आप कोई बड़ा फैसला लेने जा रहे है चाहे वह किसी प्रकार का हो, उस समय अगर आप अत्याधिक क्रोध में हो या अत्यधिक खुशी में तो उस समय आप कोई भी फैसला न ले। फैसला अगले दिन या रूककर लें और हमेशा शांत और एकाग्र मन से ही ले।