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हलचल-एक परिवर्तन : A Diversity

एक विशालकाय चट्टान विशाल सागर की लहरों से एक छोटे से गांव की रक्षा करती थीं। जब भी तूफान आता था तो ये चट्टान उस तूफान से लड़कर उसे पस्त कर देती थी। समय बीतता गया और एक समय आया जब प्रकृति ने पृथ्वी पर एक परिवर्तन लाने की ठानी, पृथ्वी पर एक बड़ी हलचल हुई, जिस कारण सागर में बहुत भंयकर तूफान आया, जो शायद अब तक का सबसे बड़ा तूफान था। इस बार समुन्दर की असीमित शक्ति वाली धारा ने उस चट्टान को धराशायी कर दिया। इस कारण गांव में भयंकर बाढ़ आ गयी और वह छोटा-सा गांव तहस-नहस हो गया।
इस हलचल से पृथ्वी को एक नया रूप मिल गया जहाँ पहले गांव था वहाँ पर अब जल ही जल था। अब समुन्दर का विस्तार मीलों और बढ़ गया था।
इस भयंकर तूफान के कारण कई लोंगों की जान चली गयी और बाकि के बचे लोग एक दूरस्थ
सूखे स्थान पर जाकर फिर से एक गांव बनाकर रहने लगे। समाप्त हो चुके गांव में एक किसान, उसकी पत्नी और उसका एक एकलौता पुत्र किशन
रहता था। इस भयंकर बाढ़ ने पुत्र को अपने पिता से सदा के लिए अलग कर दिया था। अब किशन अपनी माँ के साथ इस नये गांव में रहने लगा था। समय बीतता गया। सब कुछ सही चल रहा था। कई बर्ष बीत गए पुनः प्रकृति ने हलचल की और फिर से परिवर्तन लाने की ठानी। इस बार गांव में भयंकर सूखा पड़ गया। सूर्य अपने पूरे तेज पर था, आसमान पर दूर-दूर तक बादलों का नामो-निशान तक नहीं था। इस सूखे के कारण कोई फसल भी नहीं उपज पायी और गांव में भयंकर अकाल पड़ गया। तालाबों का पानी सूखने लगा, लोगों के पास खाने के लिए अनाज भी कम होने लगा।


कुछ लोग प्रकृति की इस हलचल से हार मान, गांव से प्रस्थान करने लगे। धीरे-धीरे काफी सारे लोग गांव से प्रस्थान कर गये। भूख और प्यास के कारण किशन की माँ की हालत बिगड़ने लगी, किशन ने भी अपनी माँ से गांव से प्रस्थान करने के लिए कहा पर किशन की माँ ने प्रस्थान करने से मना कर दिया। किशन अपनी माँ की ख़राब हालत को देखकर दिनों दिन व्याकुल होता जा रहा था। वह किसी भी कीमत पर अपनी माँ को खोना नहीं चाहता था। एक दिन उसकी माँ की हालत बहुत ज्यादा बिगड़ गयी। किशन की माँ ने किशन को पास बुलाकर कहा, " बेटा इस गांव में बहुत से लाचार लोग भी रहते हैं, जो कि बेचारे गांव छोड़कर जाने योग्य नहीं है। तुम उन लाचर लोगों का साथ कभी मत छोड़ना क्योंकि तेरे पिता भी चाहते तो बाढ़ से बचकर तेरे और मेरे साथ आ सकते थे परन्तु उन्होंने तुझे और मुझे सुरक्षित बाढ़ से निकालकर और कई गांव वालों की जान बचाई और उनकी जान बचाते-बचाते खुद की जान गवां दी।"  इतनी बात कहकर उसकी माँ किशन को छोड़कर सदा के लिए चली गयी।
इस दर्दनाक हादसे से किशन के दिल को एक भयंकर सदमा पहुंचा। किशन अब अनाथ हो चुका था पर किशन को जीने के लिए एक सशक्त वजह मिल गयी थी। वह वजह इतनी सशक्त थी कि उसने किशन के अंदर एक जबरदस्त हलचल पैदा कर दी। जब भी कोई हलचल होती है तो परिवर्तन अवश्य होता है। प्रकृति की हलचल धरा को बदल देती है परन्तु एक इंसान के अंदर जब हलचल होती है तो वह सारी प्रकृति को ही परिवर्तित कर देती है। किशन की जिंदगी का अब एक ही मकशद था- 'गांव वालों को पानी उपलब्ध कराना'। उसने गांव के बुजुर्ग लोगों से सलाह मांगी की पानी को कहाँ से ढूंढा जाये। सभी का कहना था कि भगवान ही हमें बचा सकते है ।अगर बारिश होगी तभी हम बचेंगे नहीं तो हमारा यहां मरना तय है क्योंकि हमारे चारों ओर दूर-दूर तक पानी नहींं है। "लेकिन कोई तो रास्ता अवश्य होगा", किशन पूछता हैं । एक बुजुर्ग कहता है कि एक रास्ता है जो असंभव है । किशन को आशा की किरण दिखाई देती है, वह कहता है कि आप बताइये मैं उसे सम्भव बनाऊंगा। बुजुर्ग उसे बताता है कि अगर वह इस धरती का सीना चीर सके तो धरती के अंदर पानी निकल आयेगा परन्तु यह धरती इतनी ज्यादा कंकरीली है कि इसके अंदर पत्थर ही पत्थर हैं। इसे खोदना नामुमकिन है और सूखे के कारण पानी भी काफी गहराई में मिलेगा।किशन को पहली बार तब पता चला की धरती के अंदर से जल निकाला जा सकता है। उसने तुरन्त धरती खोदने की योजना तैयार की। उसने गांव से खुदाई वाले कुछ औजार
एकत्र किये और एक स्थान का चयन कर उसकी खुदाई करने लगा। कुछ दिन के संघर्षमय प्रयास के कारण कुछ खुदाई करने में सफल रहा लेकिन जब धरती से कंकड़ पत्थर निकलने लगे तब खुदाई करना और भी कठिन हो गया। अब तो किशन को भी लगने लगा कि शायद वो निर्थक प्रयास ही कर रहा है।
गांव वाले उसे समझा रहे थे की वह व्यर्थ की मेहनत कर रहा है। कोई भी उसका साथ देने के लिये तैयार नहीं था। जब तालाब का पानी लगभग ख़त्म होने लगा, अनाज का भंडारण भी ख़त्म होने वाला था तब गांव के समर्थ लोग जो बारिश का सहारा अब बिलकुल ही छोड़ चुके थे। वो सब गांव से प्रस्थान कर गये। अब तो कुछ चंद अपाहिज लाचार लोग ही गांव में बचे हुए थे। जिनका कोई सहारा नहीं था। अब तो किशन का संकल्प और भी ज्यादा दृृृढ़ हो गया। उसने उन चंद लोगों से उनका सहयोग माँगा। हालाँकि लगभग सभी वो अपाहिज लोग थे पर वो सभी सहयोग के लिए तैयार हो गए, क्योंकि उनके पास इसके सिवा और कोई रास्ता नहीं था। किशन पूरी ताकत और सिद्धत्त के साथ पुनः खुदाई के काम में जुट गया। अथक प्रयासों के बाद वह कंकर पत्थर खोदकर उन्हें हटाने में सफल होने लगा। गांव के लोगों ने उसका भरपूर साथ दिया।उनके साथ कि वजह से किशन का हौशला और भी बढ़ता चला गया। काफी लंबे समय की मेहनत के बाद वह काफी गहरी खुदाई करने में सफल हो गया। अब तो गांव के तालाबों का पानी एक दम ख़त्म ही होने वाला था परन्तु अभी तक खुदाई से पानी मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे थे। किशन खुद भी कभी-कभी निराश हो जाता था। और बो दिन भी आ गया था जब तालाबों का पानी बिलकुल ख़त्म हो गया था। अब भयंकर तपती धरती पर उन लोगों का जीना दुश्बार हो गया। अब उनकी आशा की किरण मंद पड़ चुकी थीं, उन्हें चारों तरफ से अपनी मृत्यु नजर आ रही थी। किशन के अंदर की हलचल उसे किसी भी कीमत पर प्रयास न छोड़ने के लिए विवश किये हुए थी।
अब उस अंतिम दिन जब पानी एक दम ख़त्म हो चुका था। गांव के सभी लोग प्यास से तड़प रहे थे और कोई भी कार्य न कर पाने की स्थिति में आ गए थे। उनमें में से कुछ लोग प्यास के कारण मूर्छित हो गए थे लेकिन किशन अभी भी अपना अंतिम प्रयास करने में जुटा हुआ था। अपार मेहनत करने के साथ-साथ उसकी प्यास बढ़ती जा रही थी। प्यास इतनी ज्यादा बढ़ गयी कि किशन वही मूर्छित हो कर गिर गया। अब उस गढ्डे कि गहराई धरा के पानी के एक दम समीप पहुंच चुकी थी। आख़िरकार अब वो मंजर आ ही गया जब धरा का पानी धीरे-धीरे धरा को गीला करता हुआ बाहर आने लगा। रात हो चुकी थी किशन वहीँ बेहोश पड़ा था।
अगले दिन कई दर्द भरें दिन और रातों के बाद किशन और गांव वालों के लिए एक नई सुबह का उदय हो ही गया। प्रकृति में एक नया परिवर्तन आ गया। सुबह तक गांव के सभी लोग प्यास के कारण मूर्छित हो गए थे पर उनमें से एक व्यक्ति जो अभी होश में था उसके मन में एकाएक विचार आया क्यों न देखा जाये, शायद किशन पानी निकालने में सफल हो गया हो । जब वह वहाँ पंहुचा तो उसकी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था क्योंकि अब पानी उस गहरे गड्ढे में काफी हद तक ऊपर आ चुका था। वह तुरन्त ख़ुशी से दौड़कर उस गड्ढे में चला गया और तुरन्त उसने उस अमृत समान पानी को दोनों हाथों से भर लिया। उसने देखा कि पास में ही किशन मूर्छित पड़ा हुआ है।उसने तुरन्त दोनों हाथों में लिए हुए पानी को किशन के मुख पर डाल दिया। कुछ समय बाद किशन होश में आ गया । जब किशन ने अपनी आँखे खोली तब उसने अपनी आँखों के सामने अपने सपने को साकार पाया। किशन ने खुद को अपने पिता का सच्चा पुत्र होने और अपनी माँ की कहीं हुई बात पर खरा उतरने का एहसास महसूस किया।
आख़िरकार उसके अंदर की हलचल एक परिवर्तन लाने में सफल हो ही गयी। उसके इस प्रयास के कारण गांव के बचे हुए लोगों को एक नई जिंदगी मिल गयी। अब वह विशाल गड्ढा पूरा भर गया। अब वह पानी पशु पक्षियों एवम सिंचाई के लिए भी काम आने लगा। वह छोटा सा गांव एक बार फिर से एक बड़े से गांव में तब्दील होने लगा। अब गांव के चारो ओर हरियाली-ही-हरियाली छाने लगी। गांव में खुशियाँ-ही-खुशियाँ आ गयी। अब इस सुन्दर से गांव को एक नया नाम मिल गया था, और वह था :-
                                ।। ""किशनपुर"" ।।

    परिवर्तन संसार का सार्वत्रिक नियम है। पृथ्वी के भूगर्भ में जब भी थोड़ी सी हलचल होती है तो धरती पर एक बड़ा सा परिवर्तन आ जाता है। ठीक इसी प्रकार हमारे अंदर की थोड़ी सी हलचल जिंदगी में एक बहुत बड़ा परिवर्तन ला सकती है। इसके लिए हमें कोई न कोई एक ऐसी सशक्त वजह अवश्य ढूंढनी पड़ेगी जो हमारे अंदर एक सशक्त हलचल मचा सके।

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