राम की शक्तिपूजा की व्याख्या भाग 12 | ram ki shaktipuja ki vyakhya | part 12
ram ki shaktipuja ki vyakhya part 12
ram ki shaktipuja ki vyakhya part 12
प्रस्तुत पंक्तियां छायावादी कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रचित ‘राम की शक्ति पूजा’ से ली गई हैं। मूल रूप से यह कविता उनके काव्य संग्रह ‘अनामिका’ में संकलित है।
प्रस्तुत पंक्तियां छायावादी कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रचित ‘राम की शक्ति पूजा’ से ली गई हैं। मूल रूप से यह कविता उनके काव्य संग्रह ‘अनामिका’ में संकलित है।
प्रस्तुत पंक्तियां छायावादी कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रचित ‘राम की शक्ति पूजा’ से ली गई हैं। मूल रूप से यह कविता उनके काव्य संग्रह ‘अनामिका’ में संकलित है।
बैठे मारुति देखते राम चरणारविंद- युग अस्ति नास्ति के एक रूप गुण-गण अनिंद्य साधना मध्य भी साम्य वाम कर दक्षिण पद दक्षिण कर तल पर वाम चरण, कपिवर गद्गद् । पा सत्य सच्चिदानंद रूप विश्राम धाम जपते सभक्ति अजपा विभक्त हो राम नाम ।। युग चरणों पर आ पड़े अस्तु वे अश्रु युगल देखा कपि ने … Read more
प्रस्तुत पंक्तियां छायावादी कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रचित ‘राम की शक्ति पूजा’ से ली गई हैं। मूल रूप से यह कविता उनके काव्य संग्रह ‘अनामिका’ में संकलित है।
nath sahitya ki pramukh visheshtaon ko samjhane ke lie is article ko pura padhen .
भारतेन्दु हरिश्चंद्र के प्रभाव से उनके इर्द-गिर्द साहित्यकारों का एक खासा मण्डल तैयार हो गया था जिन्हें ‘भारतेन्दु मण्डल’ कहा जाता है।
Arambhik hindi ki vayakaranik visheshtaon ko samjhane ke lie is lekh ko pura padhie .